एनआईए की अदालत ने तीन अलगाववादी नेताओं को 10 दिन की हिरासत में भेजा
अलगाववादी इस देश की सबसे बड़ी समस्या के रूप में उभर कर सामने आए हैं। जम्मू कश्मीर में अधिकतर समस्याएं अलगाववादियों के समर्थन के कारण उत्पन्न होती हैं। जम्मू कश्मीर में स्थानीय आतंकवादियों का समर्थन और वहां के आम जनजीवन पर बंद का प्रभाव आए दिन इन्हीं अलगाववादियों की वजह से देखने को मिलता है। कई बार इन अलगाववादियों के पाकिस्तान में बैठे हैं हाफिज सईद और अन्य आतंकवादियों के संगठन से जुड़ाव की पुष्टि पाई गई है। दिल्ली की एक विशेष अदालत ने 2008 में मुंबई हमले और आतंकवादी हाफिज सईद से कनेक्शन के मामले में तीन अलगाववादी नेताओं को एनआईए की हिरासत में 10 दिन के लिए भेज दिया है।
तीन अलगाववादी नेता भेजे गए 10 दिन की हिरासत में
दरअसल राष्ट्रीय जांच एजेंसी के न्यायाधीश राकेश स्याल के द्वारा एक बंद कमरे में अलगाववादियों को लेकर सुनवाई की गई। इन अलगाववादियों जिनके नाम मसरत आलम आसिया अंद्राबी और शब्बीर शाह है। इनको राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 15 दिनों की हिरासत की अनुमति मांगी। दरअसल 2018 में इन अलगाववादियों पर आरोप है कि उन्होंने जम्मू कश्मीर में अलग-अलग आतंकवादी गतिविधियों के लिए पाकिस्तान के आतंकवादी सैयद सलाउद्दीन और जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद के संगठन के लिए फंडिंग की थी। इन अलगाववादियों के वकील ने बताया कि अंद्राबी और शाह अलग-अलग मामलों को लेकर पहले से ही एनआईए की हिरासत में थे जबकि मसरत आलम को जम्मू कश्मीर से यहां पर लाया गया।
दरअसल एनआईए ने बताया कि इन अलगाववादियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी के तहत केस दर्ज किया गया है। जिसका मतलब यह है कि इन अलगाववादियों पर आपराधिक षड्यंत्र रचने और कानूनी गतिविधियों में रोकथाम का केस दर्ज किया गया है। हाल ही में हुए पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर में अलगाववादियों से सुरक्षा वापस लेने का फैसला किया था। केंद्र सरकार पिछले कुछ समय से अलगाववादियों पर नकेल कसने का प्रयास कर रही है।

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